Skip to main content

निखर जाने दो

छलकता है गर अल्फ़ाज़ आँखों से,
क़ीमती है, लेकिन छलक जाने दो,
मोतियों की माला को टूट कर,
इस फ़र्श पर बिखर जाने दो,
रु ब रु ख़ुद से हो कर,
ख़ुद को भी थोड़ा बिखर जाने दो,
जाने भी दो, और जीना सीखो
ख़ुद को थोड़ा और निखर जाने दो।

Comments