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जरा भी

इन दूरियों  का जरा भी , इल्म ना मुझे ,

उन बातों का जरा भी , अफ़सोस ना मुझे,

तेरे वादों पे  जरा भी , भरोसा ना मुझे ,

तुझे आज़माने की जरा भी , हिम्मत ना  मुझे ,

तेरे किसी पैग़ाम  का जरा भी , इंतज़ार ना मुझे ,

मेरी ख़ामोशी के खात्मे  का ज़रा भी , तूँ ना कर अब इंतज़ार ,

अपने रास्ते पे जरा भी , मेरा,  तूँ ना कर अब इंतज़ार ,

पूछ लिए हैं सवाल , मैंने  खुदा से अपने , इस दोज़ख में ,

कि कितने हैं खुदा इस जमीं पर ,

मेरे सवालों से पूरी खामोशी में है , मेरा  भी खुदा ,

और तेरा भी खुदा |












Comments

  1. Wow......While reading this I can only think of you the time we were in IIHMR, pata nahi kyu it connects me to those old days.

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    1. Thanks Natasha, be connected with blog for interesting articles.

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