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बीरू राज्य : अतीत, शायद सत्य

बीरू राज्य : अतीत, शायद  सत्य 

    यहाँ झारखण्ड राज्य के सिमडेगा में देखने और न देखने की बहुत सारी  जगहें हैं, उनमें  बीरू भी है पर  एक देखने की जगह। अरे यहीं पास में ही तो है बीरू , वहाँ अभी हाल ही में एक अच्छा प्राइवेट हॉस्पिटल भी खुला है और मेरे घर पर दूध ले आने  वाले भैया भी तो बीरू से ही आते है। लेकिन आज की सुबह  थी, किसी को सामने चाय की गुमटी पर बात  करते सुना कि बीरू में कभी राजा का शासन था और वहाँ पर अभी भी महल है , बस फिर क्या था मेरा बावरा मन कहने लगा कि आज छुट्टी के दिन तो यहाँ जाना ही है । मैंने भी तैयारी कर ली, चश्मा वश्मा लगा के चल दिए अपनी गाड़ी ले के।

बीरू पहुँच के पूछना पड़ा  कि भाई राजा का महल कहाँ है ? खैर , पता चला की यहीं पास में ही है, सड़क से बायीं तरफ का पहला रास्ता और फिर महल। वैसे तो महल देख के सारे अरमान धरे के धरे रह गए लगा की महल न हो के किसी पुराने बड़े जमींदार की पुरानी  हवेली हो , लेकिन अब इतनी दूर आये थे तो देख के ही जाता । 

महल के मुख्य दरवाजे पर दो शेर बने हुए थे, बाहर एक  बहुत पुरानी मारुती 800  पड़ी हुयी थी।  दरवाजा खटखटाया तो कोई हलचल ही नहीं हुयी , लेकिन कुछ देर बाद एक सज्जन आये और मेरे आने की वजह पूछ के अंदर चले गए, करीब 10 मिनट के बाद वो फिर आ कर दरवाज़े को खोले और बड़ी विनम्रता से मुझे अन्दर बुलाया।  ऊँची नक़्क़ाशीदार छतें , पुराने समय के लकड़ी के सुन्दर, भव्य फर्नीचर , मोटी और मज़बूत दीवारें, दरवाजों की नक़्क़ाशी , चौखट इन सब ने तुरंत ही ये एहसास करा दिया कि सिमडेगा के   बीरू जैसी जगह पर इतना पुराना , इतना सुन्दर और भव्य भवन कला निर्माण निश्चित ही किसी राजा का ही हो सकता है।  

अन्दर जाते ही लाल शिफॉन की प्रिंटेड साड़ी पहने हुए एक भद्र महिला ने नमस्ते कहते हुए, हाथ जोड़कर मेरा अभिवादन किया , मैंने भी विनम्रता पूर्वक उनका अभिवादन किया। उन्होंने  उस सज्जन को मुझे महल दिखाने को कहा और अंदर चली गयीं।  उस सज्जन ने  शान्तिपूर्वक मुझे महल घुमाया , ड्राइंग रूम में शेर और हिरन के टंगे हुए सिर , पुरानी राजशाही पेंटिंग्स , जिनमे राजा और रानी ने कीमती आभूषण पहन रखे हैं धूल सी जम  चुकी थी, मैंने उन्हें देखा।  पीछे की तरफ की पुरानी सीढ़िया, नक्काशीदार छत हुए , हम एक खँडहर जैसी जगह पहुँचे और पता चला कि यहाँ कभी राजा का दरबार हुआ करता था , दूर से उस सज्जन ने मुझे बताया की उस जगह पे  ज़मीन के नीचे सात मंजिला कमरे हैं और वही से सुरंगें है जो पालकोट और शंख नदी के किनारों पे निकलती थीं।  आश्चर्यचकित था मैं की जमीन के नीचे  सात मंजिल की इमारत , खैर , बातों में पूछा कि यार ये बताओ  कि राजा रानी सब कहाँ  रहते  हैं ,  और उसके ज़वाब के बाद तो मुझे काटो  तो ख़ून नहीं।  

जी हाँ , जो महिला आपसे अभी मिली थी, वही तो रानी साहिबां थीं। इतनी शालीनता , इतनी सादगी  और रानी।  मन में आया कि कहूँ रानी से मिलते हुए चलूँ , पर शर्म और संकोच ने दिल की बात जुबाँ पर ना आने दी।  लेकिन किस्मत और वक़्त के आगे भला किसी का कुछ चला है क्या आज तक।  लौटते हुए रानी साहिबां ने पूछा की आप अच्छे से देख लिए महल और मेरा नाम पूछा, फिर ये भी पूछा कि  मैं  क्या काम करता हूँ और कहाँ रहता हूँ।  मैं अचम्भित था कि मैंने किसी की पर्सनल प्रॉपर्टी देखी, वो भी घर में घुस कर तो भी परिचय बाद में पूछा गया।  आज के समय में जहाँ लोग अपने पड़ोसी को भी ड्राइंग रूम तक ही आने देते हैं, उसी समय में मैं किसी के अतीत के आईने में झाँक रहा था, बार-बार, हर बार और सामने वो भद्र महिला मुस्कुराते हुए सिर्फ नमस्कार कह रही है , ये विनम्रता, सहजता, साहस किसी रजवाड़े में ही मिल सकता है। 

उन्होंने बताया कि 1326 ई  से 1955 ई तक इस क्षेत्र में बीरू राजा का राज्य रहा , 1284 गाँव इस राज्य के अंतर्गत थे।  किस तरह से ओड़िशा के राजा गजपति और रातू राजा के राज घरानों से इनके पारिवारिक रिश्ते थे , उस जमीन के अन्दर की सात मंजिली इमारत जिसे सतघरा भी कहते हैं उनमें सोना गड़ा  हुआ है. कैसे उन सोनो को मंत्र से सुरक्षित किया गया है , जिस लिपि में मंत्र को लिखा गया है, वो कोई ऐसी लिपि है जो कल्पि  लिपि से भी पहले की है।  सब कुछ एक तिलिस्म सा लगने लगा था कुछ वैसा ही जैसा बचपन में हम चन्द्रकान्ता का हर रविवार दूरदर्शन पर शो देखा करते थे।  

शाम होने को आई थी , सतघरे के अंदर जा कर लिपि का शिलालेख पढ़ना संभव नहीं था।  नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शाम के बाद अपने टू व्हीलर से यात्रा खतरनाक हो सकती है।  इन सभी पहलुओं को और करीब से जानने और देखने के लिए बीरू राजा के महल में फिर से जाना होगा।  रानी साहिबा से विदा लेते  हुए और फिर आऊँगा कहते हुए, मैंने अपनी यादों की बारात समेटी और निकल पड़ा सिमडेगा की ओर।  

 लौटते हुए सोच रहा था  कि लगभग 650 साल का शासन करने के बाद इस राज्य ने भी बाकी राज्यों की तरह सब कुछ राष्ट्र को समर्पित कर दिया,  इस उम्मीद में कि बदलाव होगा विकास होगा।  लेकिन सिमडेगा के कई ब्लॉक और गाँव हैं,  जहाँ बिजली के पोल तो हों लेकिन बिजली नहीं , पक्के मकान तो हैं लेकिन पक्की सड़क नहीं , जनता के सेवक तो हैं लेकिन सेवा भाव नहीं और भी बहुत कुछ है, आज़ादी के 67 साल बाद भी किसी अफ्रीकी देश की याद दिला  देने वाला ये जिला,  अपने विकास की राह को देख रहा है।  अरे बस राह देख रहा है। अरे,  हम भी कहाँ की बात करने लगे, सबसे ज्यादा युवा ,  फेसबुक , 3G/4G , Levis' और मेट्रो  ट्रेन के इस देश में फुर्सत कहाँ है किसी के पास और वैसे भी  भारत को India से कनेक्ट करने के लिए तो बुलेट ट्रेन से भी ज्यादा की गति चाहिए होगी।  

हम तो ये कह रहे थे कि कहानी जो है, वो अभी अधूरी है।  अभी एक बार और जाना है, बीरू राजा के महल में।  अरे !  अभी तो सतघरे , लिपि का शिला लेख , सुरंगें , मंत्र शक्ति से सुरक्षित सोने के बारे में भी तो जानना है , फिर आप सब को तिलिस्म, रहस्य और शाही अंदाज़ से रुबरु भी करना है। तो फिर से जाएंगे कभी  और नयी कहानी ले के आएंगे आप के लिये,  'बीरू पार्ट 2' या फिर 'बीरू रिटर्न्स' टाइप से , अरे अब आज कल सीक्वल का दौर है अपने बॉलीवुड से ही सीखा है, खैर सीक्वल हो या न हो , इस कहानी को पूरा तो करना ही होगा , अब इसे तो अधूरी नहीं छोड़ सकते हैं। 

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